Friday, October 26, 2012

GIRTE SANSKAAR

आज कल की ज्यादातर फिल्मो और टीवी सिरिअलो में जिन तौर तरीको और जिन संस्कारो को दर्शाया जा रहा है उन्हें देख कर ऐसा लगता है की जैसे बेशर्मी और बेपर्दगी ही हमारी पहचान रही है .हमारी हिन्दुस्तानी सभ्यता में जीन आदर्शो और मान्यताओ को हमारे पूर्वजो ने अपने जीवन का आधार बनाया था ,उन  सभी बातो को आज निराधार समझा जा रहा है . इसका परिणाम पुरे समाज में देखने को मिल रहा है  .प्रतिदिन हर शहर हर प्रदेश में कोई न कोई पारिवारिक और सामाजिक अपराध की अनगिनत घटनाये देखने और सुनने को मिलती है .लेकिन किसी भी सामाजिक या राजनैतिक  संस्था द्वारा  ऐसा कोई कदम उठाया नहीं  जाता जिससे समाज के गिरते हुए नैतिक अस्तर को उठाया जा सके ,बल्कि  एक दुसरे की टांग खीचने में ही वे अपनी बहादुरी समझते है .शायद ये लोग भी गिरती नैतिकता के शिकार हो चुके है।अगर हमें अपने समाज और आने वाली पीढ़ी को बचाना है और उन्हें अपने आदर्शो और  सस्कारो से परिचित कराना है तो आज से ही बेशर्मी और बेहूदगी से भरी फिल्मो और टीवी सिरिअलो पर पुर्णतः पाबन्दी लगानी होगी। कला और वास्तविकता के नाम पर सेंसर बोर्ड से ए और बी का प्रमाणपत्र ले कर चलने वाली हर तरह की फिल्मो,टीवी सिरिअलो और व्यक्तिगत प्रस्तुतियों को पूरी तरह से बंद करना होगा .वर्ना वो दिन दूर नहीं जब पुरे समाज में सिर्फ नग्नता के अलावा कुछ नहीं बचेगा .